स्वामी दयानंद सरस्वती | Swami Dayanand Saraswati Biography In Hindi

Swami Dayanand Saraswati Biography In Hindi

आर्य समाज के संस्थापक, समाज सुधारक, तथा महान चिंतक। स्वामी दयानंद सरस्वती को सभी जानते हैं इनका ज्ञान स्वरूप अनेकों धाराओं में बंधा चारों ओर प्रवाहित हो रहा है। अतः इनके ज्ञान स्वरूप को स्पर्श करना मुमकिन नहीं।

स्वामी दयानंद सरस्वती एक महान स्वतंत्रता सेनानी भी थे जिन्होंने ज्ञान की अलख जगाने के साथ आजादी की ललक भी जनमानस में जगाई। सर्वप्रथम स्वराज्य की अवधारणा को प्रसारित करने वाले दयानंद ही थे। सन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के जनक माने जाने वाले भी स्वामी दयानंद ही थे जिन्होंने परोक्ष रूप से संग्राम की रूपरेखा तैयार की । देश को रूढ़ियों कुसंस्कारों अनैतिकताओं से ही नहीं अंग्रेजों से भी मुक्ति दिलाने के लिए आजीवन प्रयासरत रहे स्वामी दयानंद सरस्वती।

सत्यार्थ प्रकाश के रचयिता स्वामी जी ने सभी वेदों का सार गर्भित सुंदर भाष्य अर्थात संस्कृत में अर्थ प्रस्तुत किया। इस कारण वेदों का भाष्य कार होने से इन्हें ऋषि की उपाधि दी गई। स्वामी जी का नारा था ‘वेदो की ओर लौटो’। इनके अनुसार जो कुछ है वह वेद ही है। संसार के सभी ज्ञानो, सभी धर्मों, सभी मान्यताओं, का सार हमारे चारों वेदों में निहित है और जो वेद से परे है वह असत्य है |

अपनी ज्ञान गंगा का प्रसार चहुंओर करते हुए इनके अनुयायी भी पूरे देश में फैल गए। यदि केवल ज्ञान का प्रसार होता तो ठीक था, लेकिन यहां ज्ञान के साथ-साथ अंग्रेजों से मुक्ति पाने का प्रयास भी चल रहा था। जो कार्य अंग्रेजों को असह्य था। अतः मौके की तलाश में जुटे अंग्रेजों ने स्वामी दयानंद के खिलाफ षड्यंत्र सृजन किया और इनकी हत्या करवा दी।

स्वामी दयानंद सरस्वती का स्वामित्व ही था कि इन्हे जहर देने वाले को भी इन्होंने किसी की पकड़ में आने से पूर्व स्वयं ही भगा दिया।
अपने दया आनंद और ज्ञान के स्वरूप को सदा प्रसारित करने वाले स्वामी दयानंद सरस्वती। आज प्रत्येक जनमानस के सामने आर्य समाज और डीएवी के माध्यम से पहचाने जाते हैं।

एक गुरु की पहचान सद्गुरु के रूप में तभी संभव हो पाती है जब उसके शिष्य हंसराज, केशवसेन, भगत सिंह, लाला लाजपत राय सरीखे हों। ऐसे शिष्य जिन्होंने अपने गुरु का नाम सदियों के लिए इतिहास के पन्नों पर अमर कर दिया।

डी.ए. वी की कल्पना करने वाले स्वामी दयानंद सरस्वती यह नहीं जानते थे कि उनकी कल्पना आज इतने साकार स्वरूप में पूरे देश ही नहीं वरन दुनिया का भी हिस्सा बन जाएगी। आज हम दयानंद के ज्ञान स्वरूप को नहीं वरन उनकी ओजोमय प्रकाशमान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में अनकही तस्वीर को नमन करते हैं।

स्वामी दयानंद सरस्वती | Swami Dayanand Saraswati Biography In Hindi

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