राजस्थान का स्वर्ग : माउंट आबू

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राजस्थान की तपती धरती में माउंट आबू एक शीतल मनोरम स्थान है। राजपूताने के लहू की तरह ही यहां की धरती में भी हमेशा ही उबाल रहा है। देश पर आई हर आपदा में राजपूताने के वीर अपने शौर्य और साहस के दम पर लोहा लेते रहे हैं। उसी राजपूताने का शैलावास माउंट आबू।

आबू पर्वत समुद्रतल से 1220 मीटर ऊंचाई पर स्थित राजस्थान का एकमात्र पहाड़ी नगर है। इस पहाड़ी के ऊपर तथा अगल बगल में अनेक ऐतिहासिक स्मारक, धार्मिक तीर्थ मंदिर तथा कला भवन अवस्थित हैं। ये खूबसूरत ऐतिहासिक भवन भारत के शिल्प कला, चित्रकला तथा स्थापत्य कला की स्थाई निधियां हैं।

पुराणों में माउंट आबू को अर्बुदांचल नाम से चिन्हित किया गया है। इस स्थान को अर्बुदारण्य कहते थे अर्थात् अर्बुद का जंगल। अबू नाम अर्बुद से निःसृत उसका छोटा रूप है। माना जाता है कि अर्बुद एक सर्प था जिसने शिव के प्रिय बैल नंदी की समुद्र में गिर जाने पर प्राणों की रक्षा की थी, यह सारा वाकया इसी पहाड़ी क्षेत्र में हुआ था इसलिए अर्बुद की वीरता के कारण यह अर्बुदारण्य या अर्बुदांचल नाम से प्रसिद्ध हुआ। जो कि कालांतर में अबू नाम से जाना जाता है। महाभारत में भी इस स्थान का जिक्र मिलता है।
इस अर्बुद पहाड़ को गुर्जरों का असली घर भी माना जाता है। गुर्जरों के यहां होने का उल्लेख अनेक ऐतिहासिक दस्तावेजों तथा पुस्तकों में मिलता है। मुगलों के आक्रमण के सदियों पहले राजस्थान और गुजरात का एक बहुत बड़ा इलाका गुर्जरों का निवास स्थान था। गुर्जरों के द्वारा यह संरक्षित प्रदेश धीरे-धीरे विस्थापित होता गया, जो बाद में गुजरात के नाम से केवल नाम मात्र ही रह गया है।

ऐसा उल्लेख मिलता है कि गुरु वशिष्ठ ने यहां आबू पर्वत पर एक यज्ञ किया था। जिसका प्रयोजन था, पृथ्वी को एक ऐसा साम्राज्य या वंश प्रदान किया जाए जो यहां सत्य और धर्म की स्थापना करे, और उसकी रक्षा करे। उनके यज्ञ के पूर्ण होने पर अग्निकुंड से पहला अग्निवंशी राजपूत बाहर आया। वही राजपूत क्षत्रिय जो सदियों से देश की आन बान और शान के लिए मिटते और मिटाते आए हैं।

कभी चौहानों कभी परमारों का शासन क्षेत्र रहा अबू प्रदेश बाद में अंग्रेजों का पसंदीदा स्थान बन गया। राजस्थान प्रदेश में माउंट आबू मैदानी इलाकों की गर्मियों से बचने के लिए अंग्रेजों का प्रिय और खूबसूरत स्थान था।
जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर जैन के यहां आने के कारण यह जैनों का पवित्र तीर्थ स्थल भी माना जाता है। यहां का सबसे प्रमुख आकर्षण दिलवाड़ा मंदिर जैन धर्म के तीर्थंकरों को समर्पित है।

दिलवाड़ा मंदिर 5 मंदिरों का एक समूह है। ये मंदिर हैं- विमल वसाहि मंदिर, लूना वसाहि मंदिर, पित्तलहार मंदिर, श्री पार्श्वनाथ मंदिर, तथा श्री महावीर स्वामी मंदिर। संगमरमर से बने इन मंदिरों में लगभग 48 स्तंभों में नृत्यांगनाओं की आकृतियां बनी हुई है।

अपने ऐतिहासिक महत्व एवं संगमरमर पत्थरों पर बारीक नक्काशी की जादूगरी के लिए पहचाने जाने वाले इन विश्व विख्यात मंदिरों में शिल्प सौंदर्य का ऐसा बेजोड़ खजाना है, जिसे दुनिया में और कहीं नहीं देखा जा सकता।
इन मंदिरों में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ, 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ, 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ, तथा 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी, की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित हैं। इनके साथ साथ हिंदू देवी देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं।

माउंट आबू का दूसरा सुंदर पर्यटन स्थल है नक्की झील। यह एक मीठे पानी का खूबसूरत झील है, जो राजस्थान का सबसे ऊंचा झील है। कहा जाता है कि हिंदू देवता ने अपने नाखूनों से खोदकर यह झील बनाई थी, इसलिए इसे नख या नक्की झील कहते हैं। सूर्यास्त के समय आसमान के बदलते रंगों की छटा देखने सैकड़ों पर्यटक यहाँ आते हैं। यहाँ कार्तिक पूर्णिमा के स्नान का बहुत महत्व है।

इसके अलावा गोमुख मंदिर वह स्थान है जहां गुरु वशिष्ठ ने यज्ञ किया था। यहां एक वन्य जीव अभ्यारण भी है। जहां पक्षियों की लगभग ढाई सौ और पौधों की 110 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां मेंढक की आकृति और कछुए की आकृति वाले विशालकाय पत्थरों को देखने का अपना एक अलग आनंद है।

सनसेट पॉइंट, हनीमून प्वाइंट, रघुनाथ मंदिर, अर्बुदा देवी मंदिर आदि अन्य दर्शनीय पर्यटन स्थल यहां पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

माउंट आबू ब्रह्मकुमारियों का प्रमुख केंद्र भी है। यहां हर साल लाखों ब्रम्हाकुमारियों का जमावड़ा भी लगता है, उनकी आध्यात्मिक परिचर्चा के लिए।

उत्कृष्ट हस्तशिल्प का बेहतरीन बाजार यह माउंटआबू प्रदेश, हिंदू और जैन दोनों ही धर्मों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। पर्यावरण की खूबसूरती का नजारा लेने वालों के लिए भी यहां बहुत कुछ लुभावना है।

सिरोही जिले में स्थित माउंट आबू अपने स्वास्थ्यवर्धक जलवायु के साथ एक परिपूर्ण पौराणिक परिवेश भी है।
आए दिन मेला जमावड़ा, हर समय सैलानियों की हलचल, चाहे वह ग्रीष्म हो या शरद, यही है माउंट आबू की खूबसूरती की पहचान।

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