कफ्नों और कब्रों पर गुलिस्तां सजाता : अफ़गानिस्तान

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दक्षिण एवं पूर्व में पाकिस्तान, पश्चिम में ईरान, उत्तर में तुर्कमेनिस्तान, उज़्बेकिस्तान एवं ताजिकिस्तान तथा उत्तर- पूर्व में चीन से घिरा पहाड़ों और कबीलों का देश – अफगान भूमि – अफगानिस्तान – अपने अनूठे रंग-ढंग एवं व्यवहार के कारण विश्व भर में तकरीबन सब की स्मृति में स्थित हो चुका है।

6,52,000 स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्रफल का यह देश जिसकी राजधानी काबुल तथा जनसंख्या तकरीबन 32 मिलियन है, चारों ओर से जमीन से घिरा, पस्तूनों, ताजिकों और उज्बेकों का देश है। अपना स्वतंत्रता दिवस 19 अगस्त को मनाने वाला अफगानिस्तान कई लड़ाइयों और विवादों से जूझता, कफ्नों और कब्रों पर भी गुलिस्तां सजाने वाला देश है।
पुरातन काल में हिंदू फिर बौद्ध और फिर इस्लाम और पारसी धर्म को मानने वाला अफगानिस्तान पारसी धर्म का जन्म स्थान भी माना जाता है। आज मुख्यतः इस्लामी इस राष्ट्र में 50% लोग दारी और 35% लोग पश्तो ज़बान बोलते हैं। खनिज तेल एवं गैस से समृद्ध यहां के लोग मुख्यतः कृषक हैं।

अपने परिवार और बुजुर्गों की इज्जत करने वाला, अतिथि की सेवा सर्वप्रथम करने वाला, एक पुरुष प्रधान समाज – अफगानिस्तान औरतों को अत्यधिक मान मर्यादा का पहलू समझता है। यहां औरतों का पुरुषों से सीधे आँख मिलाना स्वीकार्य नहीं माना जाता एवं बचने की सलाह दी जाती है। बावजूद इसके नए – मॉडर्न देश में कई महिलाएं घर से बाहर निकल पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कार्य कर रही हैं।38.2% साक्षरता दर रखने वाले इस देश में मोबाइल एक धनी और अमीर होने का चिन्ह माना जाता है और करीब 90% लोग मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हैं।

यहां का राष्ट्रीय खेल ‘बुज़काशी’ एक बड़ा ही खतरनाक एवं दिलचस्प खेल है जिसे कमजोर हृदय वाले नहीं देख सकते। इसमें एक सर कटा बकरा मैदान के बीच में रखा होता है और घुड़सवार प्रतिद्वंद्वी इसे उठाकर निश्चित स्थान पर ले जाने का द्वंद्व करते हैं। बहुत ही साधारण प्रतीत होने वाला यह खेल भयानक साबित हो सकता है। केवल मजबूत हृदय एवं बाजू में बेइंतहा ताकत के साथ एक भली-भांति – 4 से 5 साल – प्रशिक्षित घोड़े के मालिक जो कि मुख्यतया 40 वर्ष से अधिक उम्र के ही होते हैं, के द्वारा ही जीता जा सकता है। विजेता को ‘चापंदाज़’ कहते हैं और यह बहुत सारे उपहारों से नवाज़ा जाता है।

प्रत्येक गुरूवार – रात्रि को पश्चिमी शहर हेरात में ‘कविता – रात्रि’ का उत्सव सा मनाया जाता है जहां हर उम्र के स्त्री, पुरुष और बच्चे इकट्ठा हो नवीन एवं पुरातन कविताओं का आदान-प्रदान करते हैं | साथ ही अपने पारंपरिक संगीत का आनंद एक अच्छे भोज और मीठी चाय के साथ लेते हैं।

विश्व की प्रथम तैल- चित्रों में उकेरी बौद्ध धर्म की कलाकृतियां बामियान की कंदराओं में आज भी देखी जा सकती हैं। बामियान का बंद- ए -अमीर नेशनल पार्क आकर्षण का मुख्य केंद्र है। इसके अलावा पर्यटक काबुल में भी कई पार्कों, वाटर पार्कों एवं स्केटिंग, फुटबॉल, स्नूकर बिलियर्ड्स तथा बॉलिंग के कोर्टों एवं स्टेडियमों का आनंद ले सकते हैं।

पौराणिक किलों, कलाकृतियों, कई विशाल मस्जिदों, बागों पार्कों एवं नैसर्गिक स्थलों के साथ नवीन तकनीकी क्रीड़ा स्थलों से सजा यह देश अपनी जीवट के साथ हर कल के हृदय विदारक पीड़ा को चीड़ उसकी छाती पर बैठा आज भी मुस्कुरा कर सब के स्वागत में खड़ा है…

कफ्नों और कब्रों पर गुलिस्तां सजाता : अफ़गानिस्तान

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