एक गौरवगाथा : Armenia

Armenia

उत्तर एवं पूर्व में ‘जॉर्जिया ‘एवं ‘अजरबैजान ‘दक्षिण पूर्व में ‘ईरान’ एवं पश्चिम में ‘तुर्की ‘से गिरा Armenia जो कि विशाल पर्वत श्रृंखला ‘कॉकस ‘के दक्षिण में स्थित है, यहां की राजधानी येरेवान (Yerevan)विश्व के सबसे पुराने शहरों में से एक है – जो कि 782 ई. पू. में स्थापित हुआ एवं रोम से भी 29 साल पुराना है – तथा यहाँ की आधिकारिक भाषा अर्मेनियाई है।

प्राचीन Armenia विश्व की प्रमुख सभ्यताओं में से एक था। आज यह पहले की तुलना में काफी छोटा रह गया है।अपने चरम पर यह दक्षिण-मध्य ‘ब्लैक सी’ तट से लेकर कैस्पियन सागर और भूमध्य सागर से लेकर वर्तमान ईरान में उर्मिया झील तक फैला हुआ था। कई आक्रमणों से बार-बार जूझने के बाद 14वीं शताब्दी में इसने अपना स्वरूप खो दिया जब रूस ने पूर्वी अर्मेनिया पर कब्जा कर लिया और बाकी पश्चिमी भाग ऑटोमन साम्राज्य, जो कि आज का तुर्की राष्ट्र है, के द्वारा पीड़ित होता रहा। सोवियत संघ के द्वारा अधिग्रहित Armenia ने काफी जद्दोजहद के बाद 23 सितंबर 1991 को अपने आप को स्वतंत्र घोषित कर दिया, जबकि पश्चिमी भाग अभी तक तुर्की के अधीन है।

यह एक पहाड़ी देश है जहां की औसत ऊंचाई 18 मीटर यानी 5,900 फीट है। आधे से ज्यादा क्षेत्र 3,500 से 6,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। नैसर्गिक छटाओं का यह देश भूगर्भीय अस्थिरताओं का भी प्रदेश है जहां कई गहरी नदी, घाटियां और सुप्त ज्वालामुखी के पठार हैं। यहां की ‘sevan lake’ यूरोप और एशिया की सबसे बड़ी जिलों में से एक है।

यहां की राजधानी है येरेवान ‘गुलाबी शहर’ के नाम से प्रसिद्ध है। इसका कारण यह है कि यहां की इमारतों का निर्माण मुख्य रूप से बसाल्ट या टफ़ से किया जाता है जो हल्के गुलाबी रंग का होता है जिस वजह से पूरा शहर एकबारगी देखने में एक अनोखी गुलाबी छटा प्रस्तुत करता है।

यहां का टाटेव-केवल-वे (Tatev-cable-way) या ‘विंग्स ऑफ टाटेव'(Wings of Tatev) जो कि 320 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, द्विपथगामी रोपवे है एवं ऑस्ट्रियन-स्विश इंजीनियरिंग का एक विलक्षण नमूना है एवं टाटा मॉनेस्ट्री तक जाने का रास्ता है। यह 5,752 मीटर लंबा है एवं इस दूरी को मात्र बाद 12 मिनट में पूरा करता है। रौद्र वोरोटन नदी-Vorotan River– के ऊपर का न्यूनतम पथ जो कि अपनी नैसर्गिक छटा में अद्वितीय है, अपनी इस उपलब्धि के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है…

2011 में यहां विश्व का सबसे पुराना शराबखाना एक गुफा में अरेनी गांव के नजदीक मिला है। इसके अलावा यहां आज तक का सबसे पुराना – करीब 5500 साल – चमड़े का जूता भी मिला है
अर्मेनिया –Armenia– जिसे लैंड ऑफ चर्चेज़ – Land of churches– भी कहा जाता है, हर जगह गिरिजा घरों से भरा पड़ा है। यहां बहुत पहले ही करीब चौथी शताब्दी में ईशा मसीह के मृत्यु के बाद ही, उनके अनुयायियों ने ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार किया तथा विश्व का सबसे पहला चर्च – एचमिआडज़िन कैथेड्रल-Echmiadzin Cathedral– बनाया। और चौथी शताब्दी में ही अपने आप को इस ने ईसाई देश घोषित कर दिया। ऐसा करने वाला यह विश्व का सबसे पहला देश था…

आज विश्व में शतरंज की ऐसी परंपरा जैसी अर्मेनिया –Armenia– में है, कहीं भी नहीं। यहां आधिकारिक रूप से प्राथमिक स्कूल से ही पाठ्यक्रम में शतरंज अनिवार्य रूप से शामिल है। और इसलिए पर व्यक्ति दर के हिसाब से सबसे ज्यादा लोग शतरंज खेलते हैं। यह आज विश्व के चोटी के शतरंज खेलने वाले देशों में से एक है और तिगरान पेट्रोसियन – Tigran Petrosian- के 1963 से 1969 तक विश्व चैंपियन बनने से शुरू हुआ यह सफ़र आज भी चल रहा है जहां आज भी अर्मेनिया औसत रूप से प्रमुख खिलाड़ियों के रैंकिंग के हिसाब से विश्व में छठा देश है…

1915 ई. में ऑटोमन सरकार जो आज के तुर्की का पुराना स्वरूप था, ने यहां एक भीषण नरसंहार (Genocide) को अंजाम दिया इसकी वजह से डेढ़ मिलियन लोग मारे गए और आज भी जहां देश में 3 मिलियन लोग रहते हैं वहीं विश्व भर में 10 से 12 मिलियन आर्मीनियाई लोग रहते हैं जो कि मुख्यतया विस्थापित हैं।
बाइबिल में वर्णित ‘ माउंट अरारात-Mount Ararat ‘ आर्मीनिया का पहचान चिन्ह है यह यहां के राष्ट्रीय चिन्ह में भी उद्धृत है। पर, दुखद रूप से यह आज के अर्मेनिया के सीमाओं में नहीं बल्कि तुर्की में है जो कि आसानी से येरेवान से देखा जा सकता है।

अर्मेनिया को खुबानी की मातृभूमि माना जाता है। यहीं से यह पूरे एशिया और यूरोप में पहुंचा। इसे आर्मेनियन सेब-Armenian Apple- भी कहा जाता था। यहां का प्रसिद्ध वाद्य यंत्र ‘डुडुक’-Duduk- भी इसी की लकड़ी से बनाया जाता है। यही नहीं, अनार यहां के जीवन का प्रतीक सा है। यहां की मान्यता के अनुसार एक परिपक्व अनार में कुल 365 दाने होते हैं जो साल के हर एक दिन को दर्शाते हैं अनार यहां की कलाकृतियों, कालीनों और अन्य डिजाइन पेटर्नों में भी खूब देखने को मिलता है…

ईसाइयत को सबसे पहले स्वीकार कर विश्व को एक नई राह दिखाने वाला – यातनाओं के उपरांत भी कटे-फटे अंगों को सहलाता उठ खड़ा हुआ – विज्ञान के पंखों पर सवार – शतरंज से पूरे विश्व को अपने वजूद का एहसास करवाता – अनार और वाणी से विश्व का स्वागत करता – विशाल अर्मेनियन साम्राज्य का अंग – Armenia – पूरे विश्व के लिए एक खूबसूरत मिसाल है…

एक गौरवगाथा : Armenia

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