अफ्रीका का पेरिस – अंगोला

1975 तक पुर्तगाल का उपनिवेश रहा अंगोला, जो उसके बाद भी लगातार 27 साल तक गृह युद्ध से जूझता रहा, ने 2002 में अपने आप को स्वतंत्र घोषित कर दिया। करीब-करीब दो करोड़ जनसंख्या का यह देश आज एक जबरदस्त तरीके से वापसी कर मानो angola पुनर्जन्म प्राप्त कर रहा है।

यहां की राजधानी लुआंडा अटलांटिक महासागर के किनारे पर बसा 50 लाख से भी ज्यादा की जनसंख्या के साथ पूरे जोर-शोर से पुनर्निर्माण में लगा हुआ, व्यापार एवं अपनी सुंदर नैसर्गिक छटाओं के साथ विदेशियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लुआंडा आज प्रवासियों के लिए विश्व का सबसे महंगा शहर बना हुआ है, जहां अपार्टमेंट्स का किराया 6 लाख 82 हजार रुपए मासिक तक हो सकता है। अपनी उत्कृष्ट संस्कृति और भव्य वातावरण के कारण अनौपचारिक रूप से इसे ‘अफ्रीका का पेरिस’ भी कहा जाता है…

विश्व के अग्रणी विकासशील अर्थव्यवस्था वाले देशों में एक – अंगोला, प्राकृतिक संपदा से भरपूर राष्ट्र है। यहां के हीरे, लौह अयस्क, फास्फेट, पेट्रोलियम, बॉक्साइट, सोना एवं यूरेनियम के उद्योगों ने इसे आज विश्व अर्थव्यवस्था में ऊंचाई पर चढ़ा रखा है। आज यह अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा खनिज तेल और हीरे का उत्पादक है।

अफ्रीका के विशालतम झरनों में से एक ‘रुआकाना फॉल’ अंगोला में ही स्थित है। यह 2300 फीट चौड़ा एवं 390 फीट ऊंचा है।

अंगोला में वेटर को टीप देने के लिए आपको साथ में कैश रखने की कोई जरूरत नहीं है। बस पास में सिगरेट होना चाहिए यह यहां एक स्वीकार्य टिप है!

यहां का मुख्य धर्म ईसाई एवं मुद्रा क्वांज़ा है। पुर्तगीज यहां की राजकाज की मुख्य भाषा है। इसके अलावा उमबुंडू, किम्बुंडू, किकौंगो और चौक्वे भी बोली जाती है। अपने लंबे गृहयुद्ध की वजह से लाखों लोगों को खोने वाले इस देश में पुरुषों की संख्या बहुत कम है और इसलिए यह असामान्य बात नहीं यदि एक आदमी के कई अनैतिक संबंध देखने को मिलें! इसके अलावा यहां की 70% जनसंख्या 24 साल से कम की होने की भी वजह यह युद्ध ही माने जा सकते हैं…

यहां का पारंपरिक संगीत ‘सेंबा’ है। ब्राजील का सांबा इसी से उत्पन्न माना जाता है। दोनों बहुत हद तक समान होते हैं। अंगोलियन सेंबा विभिन्न उत्सवों और समारोहों के दौरान नाचने-गाने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसे ‘समुद्र का संगीत’ भी कहा जाता है…

यहां एक पेड़ ‘इम्बौंडेइरो’ बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। लोगों की धारणा है कि भगवान ने इस पेड़ को उल्टे लगाया। इसे वे ‘बोआबॉब’ भी कहते हैं। यह अजीब सा दिखने वाला पेड़ पूरे देश में एवं स्थानीय कलाओं में भी देखा जा सकता है।

‘ड्रीडलॉक हेयर स्टाइल’ जो आज पूरे विश्व में विख्यात है, जिसमें पूरे सर पर सारे बालों को पतली पतली चोटियों के रूप में गुह कर सजाया जाता है, उसका जन्म स्थान अंगोला ही है…

यह ‘अफ्रीका का पेरिस’ angola आज अपने भव्य पुनर्निर्माण, अद्भुत प्राकृतिक संपदाओं एवं दृश्यों के साथ पूरे विश्व के आकर्षण का केंद्र बना हुआ – अपनी मनमोहक संगीत और संस्कृति से लोगों को अपनी ओर खींचता हुआ – विश्व के मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक बना पूरे विश्व का स्वागत कर रहा है…

अफ्रीका का पेरिस – अंगोला

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